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संत ऑगस्टीन का कथन है "बुरे कार्यों की स्वीकारोक्ति अच्छे कार्यों की शुरूआत हैं। समझौता की अवधारणा इसी विचार पर आधारित है।

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आयकर समझौता आयोग में आपका स्वागत है

आयकर समझौता आयोग भारत में एक प्रमुख वैकल्पिक वाद समाधान निकाय है। इसका अधिदेश दो पक्षों , एक ओर आयकर विभाग एवं दूसरी ओर वाद करने वाले करदाता, के मध्य कर संबंधी विवाद को आयकर एवं धन कर अधिनियम के तहत सुलझाना है।

इस संस्था की स्थापना 1976 में भारत के सर्वोच्य न्यायालय के सेवानिवृत, मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति के एन.वानचू की अध्यक्षता में गठित प्रत्य़क्ष कर जाँच समिति (1971) की अनुशंसाओं पर की गई थी। वानचू समिति ने समझौता आयोग की परिकल्पना एक ऐसे तंत्र के रूप मे की थी जो किसी एक बार के कर वंचक अथवा बिना मंशा के कर का वंचन करने वाले को अपनी गलती सुधारने का अवसर प्रदान करता हो। वर्तमान में आयोग की सात पीठें है जो नई दिल्ली, मुम्बई, कोलकत्ता एवं चेन्नई में स्थित है।

समझौता तंत्र करदाता को आयकर विभाग को प्रस्तुत किए गए अपने आय से इतर और अधिक, अपने अतिरिक्त आय को आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान करता है।

आवेदक द्वारा, आवेदन करने के पहले, आयोग के समक्ष प्रकट किए गए अपने अतिरिक्त आय पर पूर्ण कर एवं ब्याज चुकाया जाना आवश्यक होता है। इसके पश्चात आयोग, आवेदन की स्वीकार्यता पर विचार करता है एवं स्वीकृत आवेदन पर दोनों पक्षों को अवसर प्रदान करते हुए एक समयबद्ध तरतीके से समझौते की प्रक्रिया पर कारवाही करता है।

आयोग द्वारा, आवेदन दाखिल होने की अवधि से 18 महीने के भीतर समझौता आदेश जारी करना आवश्यक होता है। जुर्माना एवं अभियोजन वाद के प्रमुख कारण होते है जिनसे मुक्त करने संबंधी विस्तृत अधिकार आयोग को प्राप्त हैं।

आयोग द्वारा जारी आदेश अंतिम एवं निर्णायक होते है। वर्तमान में समझौता तंत्र का लाभ उन करदाताओं को जीवन में केवल एक बार मिल सकता है। जिन्होनें पहला आदेवन दिनांक 1 जुलाई 2007 को अथवा उसके पश्चात किया है।